मरहम

ना जाने कितने साल चले वो मुकदमे,
जब किसीं फुल सी बच्ची की इज्जत लुट गयी I

इतना शोर क्यू करते हो जनांब,
क्या तुम्हांरी दुकान टूट गयी ?.

वो भी किसीं बच्ची का बाप होगा,
इतना बडा कदम उठाणे से पहले,
उसने कुछ तो सोचा होगा I

जब आधे जले शरीर को देख,
खून उसका भी तो खौला  होगा.

दुकान तो उसकी भी थी ,
पर व्यापार छोड, उसने हमारे जजबातो को देख लिया,
बरसो से खून बहते जखम पर,
उसने कुछ मरहम सा रख दिया

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